Tuesday, May 12, 2009

माँ कितनी ख़ास हो तुम


सूरज का गुमान हो तुम
चाँद की मिठास हो तुम
नदिया की प्यास हो तुम
माँ कितनी ख़ास हो तुम ।

तुम न होती तो मैं न होता
तुम ने जो दिया जीवन रूपी अनमोल तोहफा
जनम जनम तक ऋणी हु तेरा
धूप में छाव हो तुम
प्यास में अमृत पान हो तुम
माँ कितनी ख़ास हो तुम ।
अपनी नींद दे कर मुझे सुलाया
मैं गिरा तो मुझे उठाया
दुनिया से लड़ना तुम्हें ने सिखाया
मेरी शक्ति ,मेरा अभिमान हो तम
माँ कितनी ख़ास हो तुम।


जग को जीवन दिया है तुमने
मौत को भी हराया है
तेरी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक पाया है
ममता की मूरत , भगवान् का वरदान हो तुम
कठोर पर भी प्यार की फुहार हो तुम
माँ कितनी ख़ास हो तुम ।
सारे दुःख मेरे,अपने आँचल में भर लेती हो
सारे सुख मुझ पे कर देती हो
सारा जग है झूठा बस यही एक सच है पूरा
माँ से बड़ा भगवान् न दूजा
माँ को समझाए ऐसे शब्द कहाँ से लाऊ
किन शब्दों में बताऊ
की कितनी ख़ास हो तुम माँ




Wednesday, April 22, 2009

8 से 12 का अधिकार

1
घर पंहुचे तो भूक से था बेहाला
पत्नी जी कर रही थी टीवी से आँखे चार
हमने कहा है प्रिये कुछ पेट पूजा करा दो।
बोली ठहरो ज़रा मिहिर का हो जाए काम तमाम ,
फ़िर लूगी आप से इंतकाम
सुनते ही हम डर गए एक कोना पकड़ कर हम भी टीवी से चिपक गए...
2
आज के सीरियल्स बड़े दिउरेबल  होते है
सदियों गरंटी के साथ आते है
सब कुछ ठीक होगा इसे उम्मीद पर
हम भी इन्हे देखते चले जाते है...
3
एक पतिव्रता के कम से कम 5 पति
और पत्नी के पुजारी ने कईयो की ज़िन्दगी सवारी
आधा जीवन षडयंत्र करने में और बाकी पतियों की गिनती में निकल जाए
हाय ये सीरियल वाले क्या क्या रंग दिखाए.....
4
कौन मरा और किस ने किस के बेटे को जना
यह समझने में निकल जाते है कई कई साल
एकता में खंडता का पैगाम लिए
जोइंट फॅमिली वाले यह सीरियल जिंदाबाद जिंदाबाद...
5
शक्ल बदलती पर इंसान न बदले
भाई क्या करे 500 साल जिंदा रहने का कांट्रेक्ट जो भरते
अरे भूत पिशाच भी इतना नहीं भटकते
हे प्रभु तुम इन पर इतनी  कृपा क्यो करते …।

और बस....
इसी तरह होती रहती जोइंट फॅमिली में हाहाकार
और हो जाता हर पत्नी का 8 से 12 टीवी पर अधिकार

जिन्दगी जीतना है

जिन्दगी जीतना है तो हार का डर कैसा ??
हारा नहीं तो जिन्दगी मे जिया कैसा दुःख तो आएगा,
पर लड़ा नही तो हंस कैसे पाएगा
आगे बड़ जिन्दगी जीने के लिए है
गिरा नहीं तो खड़ा कैसे हो पाएगा
जिन्दगी जीतना है तो हार का डर कैसा
इस भाग दौड़ को जिन्दगी ना कह
जिन्दगी को जिन्दगी कहने के लिए वक़्त दे
अंसुओ मैं डुबो दिया तो रोती हुई चली जायेगी
उठ , आगे बड़ रोक ले उसे…।वरना छोड के चली जायेगी
जिन्दगी जीतना है तो हार का डर कैसा.....

कुछ तो कमी हो....

आदमी पूरा हुआ तो देवता बन जायेगा कुछ कमी तो बाकी रहे ।
दुनिया की सारी खुशिया पाने के लिए भी
आखों में कुछ नमी बाकी रहे,
दुश्मनी में भी इतना मज़ा हो
कही दोस्ती बाकी रहे ,
मेरे प्यार की उम्र इतनी हो की
अगले जनम तक मेरी याद बाकी रहे ,
मेरी जुल्फ की कालिख में जब खो जाए तू
अपने प्यार के आगाज़ का एहसास बाकि रहे ।

उल्लू बनते जाईये…

जो भी मिले उल्लू बनते जाईये…हर ठग को अपना आदर्श मानते जाईये।
शर्म हया को रखो ताक में ,उल्लू बनने की कला सीखते जाईये।
शान से चांदी का जूता पहन कर ,जिस का सर मिले उससे बजाते जाइये।
किसी को ठग ने में क्या जाता है ??इंसान ही तो इंसान के काम आता है,
मुर्ख को मुर्ख बनाना में क्या घबराना
इसे अपना धर्मं मान का आगे बदते जाईये।
सफलता की सीढ़ी चढ़ते जाइए
जो भी मिले उल्लू बनते जाइए ।

Thursday, October 30, 2008

मैडम यह कब आएगा?

यु तो हमारा खबरों का था कारोबार,
पर ख़बर छोड़ कर सब कुछ से था सरोकार
टीवी चैनल चौखटा हमारा दो का ही तो था नाम,
एक दिन ख़बर आई की यादव जी पड़ गए है बीमार॥
अब यादव जी है कौन यह है बड़ा सवाल...
यादव जी थे बड़े नेता हमारे
हर तीसरे दिन बदलते थे कारे
देश के लिए कुछ करने का सोचते थे बारम बार
पर जब भी हो जाता सत्यनाश वो होजाते बीमार,
इस बार यादव जी को पड़ा था दिल का दौरा
तो हमरा बीपी भी कस के दौड़ा ...
सोच के की अब के टपक जाए और ब्रेकिंग न्यूज़ में हम भी दिख जाए
कैमरा मैन बिठा फट फट पे पहुंचे हम सवार ।
अभी तो दूकान सजाई ही थी
की यादव जी के चेले सारे , आ गए बन के यार हमारे ...
हमने भी शर्मा-शर्मी में पूछ लिया,भाई कैसा है यादव जी का हाल??
चहरे को कुछ ऊतार के बोले बस आप ही की दुआ कर सकती है कमाल

हमने उनको धन्यवाद किया और अपना पि टी सी पड़ना शुरू किया
इतने
में ही चेले साहब ने बिना झिझक के पूछ ही लिया
मैडम यह कब आएगा?
हमने कहा शाम साडे पॉँच
तो चहरे पे खुशी का आलम ही कुछ और था
उन्होंने फट से अपना फ़ोन उठाया और पत्नी जी को फ़ोन मिलाया
अरी सुनो भगवान हम होंगे टीवी पर आज शाम सादे पॉँच
दुखी सा चहरे बोला अब हम तो होगे अस्पताल
पर तुम फ़ोन कर के सब को दे देना ज्ञान..
हम अपना सा मुँह लिये जैसे तैसे हम यादव जी के कमरे में घुस ही गए
यादव जी की पत्नी बैठी थी एक कोने में
हमे देखते ही बाल बना के मुस्कुराई और बोली
आप ने आने में बड़ी देर लगायी…
सुन कर हम को लगा झटका
पर हम को तो था संभालना क्योंकि सवाल भी तो था

पूछना सवाल तो वही था …यादव जी का हाल कैसा था ??
सुनते ही यादव जी ख़ुद बोल पड़े
अब तो काफी बेहतर हु बेटा
देश का टेंशन है इसलिए यहाँ पड़ता है रहना
गाँधी नेहरू जेल गए थे देश के लिये
हम भी देशभक्ति लिए ज़िन्दगी से लड़ रहे है
हमारा हाजमा कुछ बिगड़ने लगा....
और हम ने कहा आप आराम करे , देश का नाम करे
आप को कुछ हो गया तो देश का उद्धार कौन करेगा
हम जैसे ही दरवाजे पर पहुचे यादव जी की जान में जान आई
और उन्होंने ज़ोर से आवाज़ लगायी और पूछ ही लिया

मैडम यह कब आएगा??